एक ख़ास दोस्त के लिये…

एक पुराने दोस्त की बहुत याद आ रही थी ज़िंदगी ने जिससे जुदा कर दिया है…
तो दिल के ख़यालों को ग़ज़ल में लिख दिया…

आप सब के साथ बाँट रहा हूँ, दुआओं में याद रखियेगा…

तू कभी बिछड़ा नहीं और तू मिला भी नहीं
पर मुझे तुझसे कोई शिकवा नहीं ग़िला भी नहीं

तू भले मुझसे ख़फ़ा है और तू दूर भी है
मगर तुझसे ऐ दोस्त दिल को फ़ासिला भी नहीं

मै कैसे दिखलाऊं तुझको दिल की सच्चाई
एक अरसे से तू मुझसे गले मिला भी नहीं

वो एक वक़्त था जब दिल से दिल मिले थे यहाँ
ये एक वक़्त है बातों का सिलसिला भी नहीं

तू मुझे कुछ समझ, मुझको तो तुझसे प्यार है दोस्त
तुझ सा कोई ढ़ूंढ़ा नहीं मिला भी नहीं

मुझे पता है मुझ में लाख कमी है शायद
ये बेरुख़ी मगर दोस्ती का सिला भी नहीं

कभी कभी मुझे लगता है भूल जाऊं तुझे
मगर ये सच है भूलने का हौंसिला भी नहीं

तू खुश रहे ये दुआ तेरी कसम रोज़ करता हूँ
और अपने ग़म का मुझे अब कोई ग़िला भी नहीं

बस इक उम्मीद है तुझ को गले लगाऊं कभी
के वो एहसास मुझे फ़िर कहीं मिला भी नहीं

रोहित जैन
07-05-2009

Published in: on जून 27, 2009 at 2:26 अपराह्न  Comments (17)  

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17 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. वो एक वक़्त था जब दिल से दिल मिले थे यहाँ
    ये एक वक़्त है बातों का सिलसिला भी नहीं

    बेहतरीन रोहित जी वाह…ज़ज्बात को बहुत खूबसूरती से ग़ज़ल में पिरोया है आपने…मेरी बधाई स्वीकार करें…बहुत दिनों बाद आपको पढने का मौका मिला है…लिखते रहा करें…
    नीरज

  2. बहुत ही खुबसूरत रचना है ………………..जो दिल को छू गयी

  3. तू खुश रहे ये दुआ तेरी कसम रोज़ करता हूँ
    और अपने ग़म का मुझे अब कोई ग़िला भी नहीं
    Rohit bhai, shabdon ke jadugar ho aap.
    Duaaen hain meri aapke aur aapke apnon ke liye

  4. एक अरसे से तू मुझसे गले मिला भी नहीं……….!सच कहा आपने गले मिलना तो दूर लोग अब तो बोलने से भी कतराते है…!जाने कैसा जमाना आ गया है….किसी से दिल नहीं मिलता ..और कोई दिल से नहीं मिलता…..

  5. बेहद ख़ूबसूरत रचना जो दिल में उतर गयी🙂

  6. मै कैसे दिखलाऊं तुझको दिल की सच्चाई
    एक अरसे से तू मुझसे गले मिला भी नहीं

    waaah !

  7. danyabad Rohit ji apko, apki gajal hamko bahut achhi lagi

  8. वो एक वक़्त था जब दिल से दिल मिले थे यहाँ
    ये एक वक़्त है बातों का सिलसिला भी नहीं

    बेहतरीन रोहित जी वाह…ज़ज्बात को बहुत खूबसूरती से ग़ज़ल में पिरोया है आपने…मेरी बधाई स्वीकार करें…बहुत दिनों बाद आपको पढने का मौका मिला है…लिखते रहा करें

    i am gopalsingh

  9. waah

  10. तू खुश रहे ये दुआ तेरी कसम रोज़ करता हूँ
    और अपने ग़म का मुझे अब कोई ग़िला भी नहीं

    बस इक उम्मीद है तुझ को गले लगाऊं कभी
    के वो एहसास मुझे फ़िर कहीं मिला भी नहीं
    बहुत सुंदर!! ऊपर वाला आपके दिल को सुकून दे।

    कौन कहता है कि मौत आएगी तो मर जाएँगे
    कोई जाकर कहे उनसे कि हम कभी जिए ही नहीं – रोहित जैन (कुछ गलत लिख दिया हो तो माफी चाहता हूँ, ऐसा कुछ शेर आपका याद है मुझे)।

  11. यार तु बेस्ट है

  12. Good point, though sometimes it’s hard to arrive to definite conclusions

  13. chooo gi dost ye dosti ki gajal dil ko…………vaki me shandar…………gajab
    कभी कभी मुझे लगता है भूल जाऊं तुझे
    मगर ये सच है भूलने का हौंसिला भी नहीं

  14. no words to say
    ins awesum yaar

  15. तू खुश रहे ये दुआ तेरी कसम रोज़ करता हूँ
    और अपने ग़म का मुझे अब कोई ग़िला भी नहीं

    Waahhhh

  16. jst awsum:)

  17. कभी कभी मुझे लगता है भूल जाऊं तुझे
    मगर ये सच है भूलने का हौंसिला भी नहीं….

    Just too good!!!


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