सोच नहीं क्या तेरी ख़ता है

आज जो तुझसे दुनिया ख़फ़ा है, सोच नहीं क्या तेरी ख़ता है
मान ले सब से तू ही बुरा है, इस में ही अब तेरा भला है

ये दुनिया तुझको जो समझे, समझे समझे समझे समझे
जो तेरा दिल जान न पाए, उस दुनिया से लेना क्या है

प्यार था जिस से उसने मारा, जीते वो, तू सब कुछ हारा
मौत तेरी जो ख़ुशियां लाए, मर जा फिर तू सोचता क्या है

चाँद नहीं वो ना ही तारे, कालिख़ लाए तेरे प्यारे
अपनी आग को तू ज़िंदा रख, सबकी ख़ातिर क्यूं बुझता है

नाम तेरा उनको ना भाया, तूने था क्यूं नाम कमाया
थे वो बड़े और वो ही बड़े हैं, बन जा छोटा, तू छोटा है

तुझको लगी थी दुनिया सच्ची, तू अच्छा तो दुनिया अच्छी
पर ये दुनिया बहुत बुरी है, तेरा दिल था जो अच्छा है

प्यार किया था, प्यार किये जा, जो दे सकता है वो दिये जा
अपने दिल में झांक तू ‘रोहित’, अच्छा बन ना, क्या तू बुरा है

रोहित जैन
05-06-2015

Published in: on अगस्त 3, 2015 at 7:23 पूर्वाह्न  टिप्पणी करे  
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सोच के देखो…

सोच के देखो प्यार में हम दोनों पूरे दीवाने हों
सोच के देखो दुनियाभर में अपने ही अफ़साने हों

सोच के देखो जुनूं इश्क़ के हम दोनों पर तारी हों
सोच के देखो दिन हैरां हों और रातें भी भारी हों

सोच के देखो दिल में अपने सचमुच के काशाने हों
सोच के देखो दो आँखों में सचमुच के मैख़ाने हों

सोच के देखो इश्क़ हक़ीक़त बाकी सब कुछ माया हो
सोच के देखो इश्क़ इश्क़ ही इस दुनिया पर छाया हो

सोच के देखो दिल की बातें सारी तुम्हे बताईं हों
सोच के देखो कुछ बातें हमने तुमसे भी छुपाई हों

सोच के देखो होठों पर मुस्कानें भरने वाली हों
सोच के देखो आँखों से दो बूँदें गिरने वाली हों

सोच के देखो चाँद सितारे तुम्हे देखकर चलते हों
सोच के देखो फूल बहारों के भी तुमसे जलते हों

सोच के देखो अंधियारों के बीच कहीं उजियारे हों
सोच के देखो ग़म के लम्हे जीवन में बंजारे हों

सोच के देखो चाँद पे सुंदर सुंदर परियां रहतीं हों
सोच के देखो इन्द्रधनुष में सतरंगी नदियां बहतीं हों

सोच के देखो ये बादल सच में ज़ुल्फ़ों के साए हों
सोच के देखो ये साये सारी दुनिया पर छाए हों

सोच के देखो सुर्ख़ लबों से फूल गुलाब के गिरते हों
सोच के देखो आँखों से सचमुच के मोती झरते हों

सोच के देखो तारे थक कर सुबह कहीं सो जाते हों
सोच के देखो चकोर चाँद से मिलने उड़कर जाते हों

सोच के देखो गंगा में पाप सभी धुल जाते हों
सोच के देखो वक़्त के सागर में सब ग़म घुल जाते हों

सोच के देखो जो सोचा वो सब हक़ीक़त हो जायें
सोच के देखो सब लम्हे ख़्वाबों से खूबसूरत हो जायें

रोहित जैन
22-6-2010

जो पारसा थे वो भी गुनहगार हो गए

जो पारसा थे वो भी गुनहगार हो गए
बिकने को अब ईमान भी तैयार हो गए

हम सोचते तो थे के ज़माने से लड़ेंगे
इस सोच से गर्दे कूचा-ओ-बाज़ार हो गए

ऐसा दग़ा किया है दोस्तों ने क्या कहें
दुश्मन भी जिसको देख वफ़ादार हो गए

हमको सजा दिया है इस दुकाने जहां में
दुनिया के लोग अपने खरीदार हो गए

सोचा था के इख़लास-ओ-वफ़ा से जीतेंगे दुनिया
ये पैंतरे अपने सभी बेकार हो गए

आँखें झुकीं रोईं भी हँसीं भी ड़रीं भी
कैसे ये सच आँखों में नमूदार हो गए

अच्छा बनूं बुरा बनूं इस सोच में ‘रोहित’
खुद से ही आज बरसरे पैकार हो गए

रोहित जैन
17-6-2010

पारसा = Religious
गर्दे कूचा-ओ-बाज़ार = Dust of houses and market places
इख़लास-ओ-वफ़ा = Friendship and Love
पैंतरे = Tricks
नमूदार = Apparent / Menifested
बरसरे पैकार = Engaged in battle

ग़म बढ़ा, बढ़ता गया, बेइन्तिहां होता गया

ग़म बढ़ा, बढ़ता गया, बेइन्तिहां होता गया
फ़ासिला सा जब हमारे दर्मियां होता गया

क्या करें इस हिज्र के आलम में हम जाएं कहां
साँस लेना भी अगर्चे इम्तिहां होता गया

क्यों ना टपके खून आँखों से, ज़हन से, जिस्म से
जज़्बा-ए-दिल प्यार में जब खूंचकां होता गया

हमने मांगा जब सनम से – क्यूं लुटा दिल – ये जवाब
वो ये कहते हैं के ये तो खामखां होता गया

किस से मांगें हम दुआ, किस से करें फ़रियाद हम
जब ज़माने सा ही दुश्मन आसमां होता गया

नामुरादी रफ़्ता रफ़्ता ये कहां लाई हमें
ख़ुद को अपने ही न होने का गुमां होता गया

इस तरह अहलेजहां में हो गया हूँ बेवक़त
तालिबानों के वतन में बामियां होता गया

जो भी मिलता है खरीदारों सा तकता है हमें
इश्क़ की कीमत लगी और दिल दुकां होता गया

जैसे ही हमने सनम को दे दिया दर्ज़ा-ए-ख़ुदा
ग़म इबादत हो गए, रोना अज़ां होता गया

अब तरसती हैं ये आँखें, ऐ क़यामत आ भी जा
अब तो जीना और मरना एक जां होता गया

ये हुजूमे दर्द जो रखा है सीने में कहीं
इसमें ‘रोहित’ खो गया और बेनिशां होता गया

रोहित जैन
11-06-2010

अगर्चे = If
खूंचकां = Dripping blood
अहलेजहां = People of the world
बेवक़त = Valueless

दिल से आज दिल का फ़ासला हो गया

दिल से आज दिल का फ़ासला हो गया
मै ज़िंदगी से और आशना हो गया

दोस्तों का इखलास परखने जो चला मै
दुश्मनों में आज मै रुसवा हो गया

था रिश्ता जिससे कभी उम्मीद का कहीं
आज वो ही शख्स देखिये खुदा हो गया

अब सोचता हूँ क्यों बढ़ाये थे हौसले
वो भी तो आज मुझसे बेवफ़ा हो गया

जो मेरी ज़िंदगी का नूर था कभी
दाग वो माथे का बदनुमा हो गया

ऐतबार रहा-सहा भी जाता रहा
जब मै ख़ुद अपना आईना हो गया

दिल दैर में और मैकदे में मक़ाम
हाय इस इंसान को ये क्या हो गया

अब तो कितने ही आगाह हो जायें सभी
हर मोड़ पर क़ज़ा का रास्ता हो गया

हवस है जीते रहने की मुझे भी
मै भी तुम जैसा ही बेहया हो गया

रोहित जैन
18/06/2007

ज़िन्दगी के मोड़ पर आके है ठहरी तिशनगी

ज़िन्दगी के मोड़ पर आके है ठहरी तिशनगी
साँस टुकड़ा अश्क़ धज्जी और गहरी तिशनगी

तन्हाइयां भी साथ हैं साथ है उम्मीद भी
कितनी सियाह और कितनी है सुनहरी तिशनगी

तिशनगी बेवा भी है तिशनगी है शोख़ भी
एक पल में ही उदासी और रुपहरी तिशनगी

प्यास कितनी पास है और दूर कितना नूर है
तिशनगी का तोड़ है बस और गहरी तिशनगी

नक़्श-ए-माज़ी भी यही और मुस्तकबिल भी है
रोशनी की छाँव है और रात ठहरी तिशनगी

हुस्न-ओ-इश्क़ ज़ख़्म-ओ-इबादत कोई शय छूटी नहीं
जिस जिन्स भी देखोगी बस है एक गहरी तिशनगी

याद के कंकर लगे और ज़ेहन के टुकड़े हुए
ज़र्रा ज़र्रा बिखरी मेरी इफ़्तार-ओ-सहरी तिशनगी

रोहित जैन
13/06/2007