तो बहुत रोया

जब तक चुप था चुप था, रोया तो बहुत रोया
ये दिल जो कभी पत्थर था, टूटा तो बहुत रोया

ऐसी तो नहीं किस्मत कोई हाल अपना पूछे
जब हाल खुद से खुद का, पूछा तो बहुत रोया

जिस शख़्स ने पलटकर जाते हुए न देखा
कल शाम उसने मुझको, देखा तो बहुत रोया

वो शख़्स ज़िंदगीभर जो प्यार बांटता था
जब जब किसी ने दिल को, तोड़ा तो बहुत रोया

वो था बड़ा ही अहमक़ माने था सबको अपना
कोई नहीं मिला जब, अपना तो बहुत रोया

आँखों पे मोहब्बत ने क्या रंग था चढ़ाया
उतरा जो आँख पर से, चश्मा तो बहुत रोया

खुश होके ज़माने को घज़लें सुना रहा था
जब खुद पे लिखने बैठा, नग़मा तो बहुत रोया

क्या मौज सी उठी थी, जिस में हुआ वो तर था
उतरा जो मोहब्बत का, दरिया तो बहुत रोया

जिस पेड़ को उसी ने सींचा था ख़ूं पिलाकर
साये में उसके जाके, बैठा तो बहुत रोया

यूं तो शिकस्त कितनीं खाईं थीं बेचारे ने
हाथों से अपने खुद ही, हारा तो बहुत रोया

ये ज़िंदगी की साज़िश उसको समझ न आई
‘रोहित’ था भोलाभाला, समझा तो बहुत रोया….

रोहित जैन
02-12-2014

मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है

मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है
जिगर का लख़्त लख़्त होंठ पर सजाना है

न जाने क्या कहा है शम्अ ने परवाने से
के अब उसे तो जल के ख़ाक ही हो जाना है

जो तूने कह दिया तो तर्क़ेमोहब्ब्त कर ली
जज़ा में अब भले ही हमको दिल जलाना है

तलाशेयार ने मुझको किया कहाँ से कहाँ
चले थे सोच के कि ज़िंदगी को पाना है

मुझे भी होने लगी अब तो चाह जन्नत की
मुझे भी ये फ़रेब आसमाँ का खाना है

मुझे तो प्यार है उदूं के इरादों से भी अब
तेरी उल्फ़त में भला लग रहा ज़माना है

मेरा चिराग़ तो कब का ये बुझ गया था मगर
तेरी निस्बत में इसे राह पर सजाना है

बुला रहे हैं मुझे मैक़दा भी मस्जिद भी
कहीं भी जाऊँ वहाँ तेरा अक्स पाना है

उफ़क़ से संगेआफ़ताब ज्यों ही आयेगा
हर एक रात को टुकड़ों में बिखर जाना है

जो वक़्त यूँ तो रेंगता है मेरी साँसों में
जो तेरा साथ हो तो पल में गुज़र जाना है

न जाने कब ये कटे पाप, हो सेहर ‘रोहित’
तुझे भी यूँ ही तब तलक तो जिये जाना है

रोहित जैन
17-12-2008

आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल

Inspired by a nazm by Azmal Sultanpuri sahab…

मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल
आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल

तू ही उर्दू का अदब और तू ही शेर-ओ-सुख़न
तू ही है गीत-ओ-रुबाई-ओ-क़ता हम्द-ए-ज़हन
तू ही है शेर का अशआर तू मफ़हूम-ए-नज़्म
तू ही महफ़िल तू ही शम्मा तू मोहब्बत की बज़्म
मै बनूं ‘मीर’-ओ-‘ग़ालिब’ तू बने मेरी ग़ज़ल
आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल

तू चमेली तू ही चम्पा तू गुलाब-ओ-गुलनार
तू ही नरगिस तू ही शहनाज़-ओ-हिना हरसिंगार
रातरानी भी तू ही और तू जूही की कली
मोगरे की तू ही ख़ुशबू तू मोतिये की हँसी
मै बनूं एक चमन तू हो मेरा फूल कँवल
आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल

तू ही लैला तू ही शीरीं तू ही हो हीर मेरी
क़ैस-ओ-फ़रहाद-ओ-राँझे सी हो तस्वीर मेरी
तू ही सोहनी का हो चेहरा मै ही महिवाल तेरा
तू ही हो श्याम की राधा मै ही गोपाल तेरा
मै बनूं राम तू बन जाये सिया का आँचल
आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल

तू वो जुगनू है के सूरज भी जिस से शरमाये
तू वो तितली है जो ख़ुशरंग फ़िज़ा कर जाये
तू ही वो हश्र है चश्म-ए-ग़ज़ाल हैं जिस से
अन्दलीबों कि हँसी तेरी सदा के किस्से
तू ही बुलबुल तू ही है चकोर पपीहा कोयल
आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल

तू ही मौसम तू ही वादी तू बहार-ए-गुलशन
तू ही पतझड़ तू ही बरखा तू ही सर्दी की चुभन
तू ही झरना तू ही नदिया तू ही सागर की लहर
तू ही चंदा तू ही सूरज तू ही तारों का शहर
तू ही बिजली तू ही पानी तू हवा ये बेकल
आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल

रोहित जैन
22-23/12/2008

तामीर = Plan
सुख़न = Poetry
रुबाई, क़ता, क़ता, हम्द = Forms of Urdu Poetry
अशआर = Couplet
मफ़हूम = Meaning / Essence
चमेली,चम्पा, गुलाब, गुलनार, नरगिस, शहनाज़, हिना, हरसिंगार, रातरानी, जूही, मोगरा, मोतिया, कँवल = Types of Flowers
हश्र = Limit
चश्म-ए-ग़ज़ाल = Eyes of Deer
अन्दलीब = Nightingale
चकोर, पपीहा, कोयल = Types of Birds

मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा

मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा
ढ़ूँढ़ो कहां जाने ये दिल दीवाना बिखरा

नाकाम मै है इस से भी ग़ारत नहीं ग़म
टूटा जो दिल ये मेरा तो मैखाना बिखरा

जो था खुदा वो कितना है मायूस देखो
वो बिखरी मस्जिद ये बुतखाना बिखरा

किस सिम्त जाऊं ले कर मै ग़म-ए-दिल
बिखरा है हर अपना, हर बेगाना बिखरा

रोहित जैन
31-12-2007

आँखों में

तेरी तस्वीर है आँखों में
फ़िर से नीर है आँखों में

दिल में लगता है ख़वाब है
इक ताबीर है आँखों में

जिस से है दिल रेज़ा रेज़ा
वो तीर है आँखों में

मेरी हालत है राँझे जैसी
बस हीर है आँखों में

तेरा अक्स तेरी सूरत तेरी यादें
यही जागीर है आँखों में

हश्र इश्क़ के दामन का
चीर चीर है आँखों में

जिसको मौत भी नहीं मिलती
वो फ़कीर है आँखों में

दिल में आंधियां चलती हैं
और धीर है आँखों में

ज़ेहन में मेरे जो सवाल है
उसकी तद्बीर है आँखों में

रुसवाई की हवा फ़िज़ाओं में
मेरी तक्दीर है आँखों में

रोहित जैन
19/12/2007

इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है

इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है
दिल को इक नये ग़म का नशा कराया है

ये कैसी हलचल मची है महफ़िल में
क्या कोई चाक जिगर महफ़िल में आया है

रो रही है रात चांद से छुपकर देखो
साज़-ए-दिल किस ख़ाकजां ने बजाया है

मत कहो किसी भी बच्चे को तुम यतीम
हर बच्चे के सर पे खुदा का साया है

दिल तारीक से तारीकतर हुआ जाता है
कैसी शम्मा है जिसे आपने जलाया है

आज तक तो कभी आवाज़ नहीं सुनी हमने
अब आपने हमें किस तौर ये बुलाया है

तीर-ए-इश्क़ की तासीर हाय क्या कहें
ज़ख़्म सीने पे उम्र भर सजाया है

मुगालते में रहे मुबालग़े के पीछे
ये समझते रहे नहीं वो पराया है

वो जाने किन हालातों से गुज़रा आने में
तुझे खुदा बना के जो तेरे दर पे आया है

लाल-ओ-जवाहर में उसको ना भुला देना
उस ही की रहमतों से ये घर सजाया है

वो सिर्फ़ महबूब है खुदा हो नहीं सकता
उसकी इबादत से तूने दिल को बहलाया है

रोहित जैन
19/12/2007

ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो

ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो
भरी तन्हाई में मुझे कुछ दूर थाम लो

तुम्हारे नाम से मुझको ज़माना जाने है
हो न जाऊं कहीं मै मग़रूर थाम लो

जो दिलों को दिलों से करता है अलग
तुम ज़माने का वो इक दस्तूर थाम लो

मै तो गुमराह हूं तुम भी खो जाओगे
कोई राह तुम तो मशहूर थाम लो

मै तन्हा ही रहा कहता हूं इसलिये
हमसफ़र मेरे हमदम  ज़रूर थाम लो

जो है हासिल नहीं उस की क्यों आरज़ू
चोट खाओगे ये अपना फ़ितूर थाम लो

रोहित जैन
07-12-2007