रदीफ़ का खेल…..

पैमानेग़म बिखर गया तो मुश्किल होगी
ये दिल से उतर गया तो मुश्किल होगी

उसे देखा है आज मुद्दतों के बाद कहीं
ये दिन भी गुज़र गया तो मुश्किल होगी

बमुश्किल हुआ, खाली हुआ अश्कों से ये दिल
ये फिर से जो भर गया तो मुश्किल होगी

हमको आता ही क्या है मोहब्बत के सिवा
ये भी जो हुनर गया तो मुश्किल होगी

वो ख्वाब में आके मुझे हौंसला देता तो है
ये सिलसिला ठहर गया तो मुश्किल होगी

अब और मत लीजिये दिल का इम्तिहान
ये दिल कुछ कर गया तो मुश्किल होगी

आदत सी है इसको तो अब वीरानों की
ये दिल जो संवर गया तो मुश्किल होगी

दिल पहले ही वहशतज़दा है, बस कीजिये
ये ग़र और ड़र गया तो मुश्किल होगी

खुश है ये देखो तो आवारामिजाज़ी से
ये लौट के घर गया तो मुश्किल होगी

वो समझता है मोहब्बत मेरी इबादत को
ये इल्ज़ाम धर गया तो मुश्किल होगी

बस यादों की उड़ानों में ही मिलता हूँ उसे
ये पर भी क़तर गया तो मुश्किल होगी

रोहित जैन
25-03-2008

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अब थोड़ा सा खेल रहा हूँ रदीफ़ के साथ, देखिये किस तरह ग़ज़ल का मूड़ बदलता है….

पैमानेग़म बिखर गया तो मज़ा
ये दिल से उतर गया तो मज़ा

उसे देखा है आज मुद्दतों के बाद कहीं
ये दिन भी गुज़र गया तो मज़ा

बमुश्किल हुआ, खाली हुआ अश्कों से ये दिल
ये फिर से जो भर गया तो मज़ा

हमको आता ही क्या है मोहब्बत के सिवा
ये भी जो हुनर गया तो मज़ा

वो ख्वाब में आके मुझे हौंसला देता तो है
ये सिलसिला ठहर गया तो मज़ा

अब और मत लीजिये दिल का इम्तिहान
ये दिल कुछ कर गया तो मज़ा

आदत सी है इसको तो अब वीरानों की
ये दिल जो संवर गया तो मज़ा

दिल पहले ही वहशतज़दा है, बस कीजिये
ये ग़र और ड़र गया तो मज़ा

खुश है ये देखो तो आवारामिजाज़ी से
ये लौट के घर गया तो मज़ा

वो समझता है मोहब्बत मेरी इबादत को
ये इल्ज़ाम धर गया तो मज़ा

बस यादों की उड़ानों में ही मिलता हूँ उसे
ये पर भी क़तर गया तो मज़ा

रोहित जैन
25-03-2008

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दिल जला उसकी तस्वीर जल गई होगी

दिल जला उस की तस्वीर जल गई होगी
इश्क़ की आखरी तहरीर जल गई होगी

नज़र उठी तो बिजली ने भी खैर मांगी
जो झुकी तो शमशीर जल गई होगी

तूने तिनका समझ के फूँक दिया
आशियाने की तक़दीर जल गई होगी

तू जो उतरी हक़ीक़त की तरह आँखों में
हर ख्वाब की तदबीर जल गई होगी

हश्र का दिन था जब मिली थी नज़र
रुसवाइयों की तक़रीर जल गई होगी

तू मिली तो ज़िंदगी जन्नत सी हुई
मेरी ज़ीस्त-ए-ताज़ीर जल गई होगी

तेरी ज़ुल्फ़ की क़ैद को देख कर हाए
दुनिया की हर ज़ंजीर जल गई होगी

मेरे पहलू में देख कर उसको
बहुतों की ताबीर जल गई होगी

रोहित जैन
04-01-2008