वो मेरा था मगर मेरा कहां था

उफ़क़ को देखकर ऐसा गुमां था
ज़मीं की दोस्ती में आसमां था

कोई उलझन नहीं थी इस से बढ़कर
वो मेरा था मगर मेरा कहां था

हुनर ही था, इसे क्या और कहिये
बड़ी तहज़ीब से नामेहरबां था

ज़मीर आया मेरी आँखों के आगे
वगरना मै भी उसका राज़दां था

यकीं तो था मुझे पर कुछ कमी थी
अजब सा फ़ासिला इक दर्मियां था

ख़ता थी, हाँ ख़ता ही थी वो मेरी
मुझे था प्यार और बेइन्तिहां था

ज़हन अहमक़ ज़बां नादां थी उसकी
मगर दिल से बुरा ‘रोहित’ कहां था

रोहित जैन
07-03-2011

उफ़क़ – Horizon
नामेहरबां – Rude
वगरना – Otherwise
अहमक़ – Foolish/Immature

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आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल

Inspired by a nazm by Azmal Sultanpuri sahab…

मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल
आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल

तू ही उर्दू का अदब और तू ही शेर-ओ-सुख़न
तू ही है गीत-ओ-रुबाई-ओ-क़ता हम्द-ए-ज़हन
तू ही है शेर का अशआर तू मफ़हूम-ए-नज़्म
तू ही महफ़िल तू ही शम्मा तू मोहब्बत की बज़्म
मै बनूं ‘मीर’-ओ-‘ग़ालिब’ तू बने मेरी ग़ज़ल
आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल

तू चमेली तू ही चम्पा तू गुलाब-ओ-गुलनार
तू ही नरगिस तू ही शहनाज़-ओ-हिना हरसिंगार
रातरानी भी तू ही और तू जूही की कली
मोगरे की तू ही ख़ुशबू तू मोतिये की हँसी
मै बनूं एक चमन तू हो मेरा फूल कँवल
आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल

तू ही लैला तू ही शीरीं तू ही हो हीर मेरी
क़ैस-ओ-फ़रहाद-ओ-राँझे सी हो तस्वीर मेरी
तू ही सोहनी का हो चेहरा मै ही महिवाल तेरा
तू ही हो श्याम की राधा मै ही गोपाल तेरा
मै बनूं राम तू बन जाये सिया का आँचल
आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल

तू वो जुगनू है के सूरज भी जिस से शरमाये
तू वो तितली है जो ख़ुशरंग फ़िज़ा कर जाये
तू ही वो हश्र है चश्म-ए-ग़ज़ाल हैं जिस से
अन्दलीबों कि हँसी तेरी सदा के किस्से
तू ही बुलबुल तू ही है चकोर पपीहा कोयल
आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल

तू ही मौसम तू ही वादी तू बहार-ए-गुलशन
तू ही पतझड़ तू ही बरखा तू ही सर्दी की चुभन
तू ही झरना तू ही नदिया तू ही सागर की लहर
तू ही चंदा तू ही सूरज तू ही तारों का शहर
तू ही बिजली तू ही पानी तू हवा ये बेकल
आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल

रोहित जैन
22-23/12/2008

तामीर = Plan
सुख़न = Poetry
रुबाई, क़ता, क़ता, हम्द = Forms of Urdu Poetry
अशआर = Couplet
मफ़हूम = Meaning / Essence
चमेली,चम्पा, गुलाब, गुलनार, नरगिस, शहनाज़, हिना, हरसिंगार, रातरानी, जूही, मोगरा, मोतिया, कँवल = Types of Flowers
हश्र = Limit
चश्म-ए-ग़ज़ाल = Eyes of Deer
अन्दलीब = Nightingale
चकोर, पपीहा, कोयल = Types of Birds

उसे प्यार करने में मै अपना घर जला बैठा

उसे प्यार करने में मै अपना घर जला बैठा
खुद अपने ही सीने पे एक नश्तर चला बैठा

हर बार सोचता था बदलूंगा आप को
हर बार उसी भूल का खंजर चला बैठा

जब भी जताया हक़, हक़ से मै जल गया
एक बार नहीं हाथ मै अक़्सर जला बैठा

जिस राह पर ठोकर लगी उस राह पर वापस
जाकर मै सोचता हूँ क्यों इस पर भला बैठा

समझा जो किसी और का मेरा ही अक्स था
अपने ही आईने पे मै पत्थर चला बैठा

रोहित जैन
01/03/2007

प्यार का आखरी अंदाज़ बाकी है

प्यार का आखरी अंदाज़ बाकी है
दिल तोड़ने का रिवाज़ बाकी है

मौत के फ़रिश्तों ज़रा कुछ पल ठहरो
मेरे आखरी नमाज़ बाकी है

चुरा ली उन्होने आज फ़िर आँखें
अब भी थोड़ा लिहाज़ बाकी है

जाने क्यों ख़ला सा लगता है
जाने क्या आगाज़ बाकी है

सबकी बातों को सुन लिया मैने
बस उसकी ही आवाज़ बाकी है

समा लेता हूँ ग़मों को सीने में
समंदर सा मिजाज़ बाकी है

अज़गार-ए-खून-ए-जिगर ही है अब तक
और भी हुस्न-ए-नाज़ बाकी है

दो-चार दिन और निकल जायेंगे
घर में थोड़ा अनाज़ बाकी है

कुछ सर आज भी ढके से दिखे
कहीं शर्म-ओ-लिहाज़ बाकी है

रोहित जैन
07/01/2007