जिस्म के नेज़े पे जो रखा हुआ है

जिस्म के नेज़े पे जो रखा हुआ है
एक तमगा है जो बस लटका हुआ है

शहर में कैसा मचा है हंगामा
आज किसका दिल यहां रुसवा हुआ है

आप ही बुत जोड़ने को कह रहे हैं
आपके हाथों से जो तोड़ा हुआ है

ये अचानक आँच आई है कहां से
शोला-ए-दिल कौन सा भड़का हुआ है

आपको भी खुश नज़र मै आ रहा हूँ
आपकी आँखों को भी धोखा हुआ है

पूछते हो क्यों करी हैं बंद आँखें
एक दरिया अश्क़ का रोका हुआ है

चीखती तन्हाइयों की सर्द आहें
कैसा है ये शोर जो बरपा हुआ है

उसकी हर इक ज़िद मुझे करनी है पूरी
मै बड़ा हूँ और वो बच्चा हुआ है

एक पल उनको लगा तर्क़े वफ़ा में
एक पल में क्या कहूँ क्या क्या हुआ है

जिन पलों को याद कर मै जी रहा हूँ
वो ही हर पल बस उन्हे भूला हुआ है

मेरी रुसवाई पे क्यों हँसते हो ‘रोहित’
आपके भी नाम का चर्चा हुआ है

रोहित जैन
22-7-2010

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