जा रहा है

वो है के वो तो जीता जा रहा है
यहाँ पर वक़्त बीता जा रहा है

ख़्याले यार ख़ुश करता नहीं है
हमारा ख़ून पीता जा रहा है

जो ख़ुद चुप है, जहाँ की…
ज़बानों को भी सीता जा रहा है

मेरा दिल जीत सकते हो तो बोलो
ज़माने भर को जीता जा रहा है

तुम्हे तो ख़्वाब जैसा दिख रहा है
मेरा तो आप बीता जा रहा है

3/7/2017
Advertisements
Published in: on अगस्त 23, 2017 at 8:53 अपराह्न  टिप्पणी करे  

छोड़ो ना

साबित किस को क्या करना है, छोड़ो ना
हर रिश्ता एक दिन मरना है, छोड़ो ना

क्यूं बस अच्छा ही करना है, छोड़ो ना
घड़ा पाप का भी भरना है, छोड़ो ना

बुरा बोल रहे हैं तुम को छोटे लोग
इन लोगों से क्या ड़रना है, छोड़ो ना

वक़्त को रोक रहे हो, कितने अहमक़ हो
वक़्त तो बहता एक झरना है, छोड़ो ना

सबको ख़ुश रखना तो नामुमकिन है दोस्त
क्यूँ तुमको ऐसा करना है, छोड़ो ना

अपनी ख़ुशियाँ आप तुम्हें पानी होंगी
ना दुनिया ने कुछ करना है, छोड़ो ना

पाना खोना, खोना पाना एक ही है
आज है ज़िंदा, कल मरना है, छोड़ो ना

जिस पन्ने पर शुरू से ग़म ही लिख्खा है
उस पन्ने को क्यूँ भरना है, छोड़ो ना

बहुत करी उम्मीद के वो समझें एक रोज़
उम्मीदों को जब मरना है, छोड़ो ना

क्यूँ रोहित जी याद पुरानी छेड़ रहे
अंगारों का ये झरना है, छोड़ो ना

20/5/2017

Published in: on अगस्त 23, 2017 at 8:51 अपराह्न  टिप्पणी करे  

मोहब्बत करने वाले खो गए हैं

मोहब्बत करने वाले खो गए हैं
और हम से लोग तन्हा हो गए हैं

नहीं पत्थर कभी पिघले जहां के
रोने वाले तो कितना रो गए हैं

हमें भी नींद आ जाए तो अच्छा
हमारे ख़्वाब तक अब सो गए हैं

जब आएगी फ़सल तब देख लेना
वो पौधे किस तरह के बो गए हैं

भले ही लाख रोका कुछ हुआ क्या
उन्हें जाना था साहब, तो गए हैं

यहीं हैं हम तो, रहना भी यहीं है
नहीं जाना जहां पर वो गए हैं

हमारी राह ठहरी, हम भी ठहरे
और वो… अपने रस्ते को गए हैं

मियाँ रोहित ज़रा काबू में कर लो
तुम्हारे ख़्वाब ज़ालिम हो गए हैं

29/6/2017

Published in: on अगस्त 23, 2017 at 8:50 अपराह्न  टिप्पणी करे  

धूल जमी है

धूल जमी है आइने को साफ़ करें क्या
बीती भूलें एक दूजे को माफ़ करें क्या

कितना कुछ है दोनों के दिल में कहने को
मिल कर इन बातों का इंकिशाफ़ करें क्या

वैसे भी आधी दुनिया को खटक रहे हैं
बचे हैं जो उन को भी ख़िलाफ़ करें क्या

किये तो हैं, मालूम है ये हम दोनों को
सोच रहें हैं गुनाहों का एतिराफ़ करें क्या

बोलने दो उन को जो बोलें फ़र्क़ ही क्या
या उतरें मैदान में, इख़्तिलाफ़ करें क्या

ग़म गुस्सा नफ़रत वहशत यादें और ख़्वाब
बहुत हुए सब इन से इंहिराफ़ करें क्या

जिन बातों में पड़ कर सब कुछ भूले थे
फिर से उन बातों का चलो तवाफ़ करें क्या

हार क्यूँ मानें रोहित साहब औरों से
हरा के उनको उनके बर-ख़िलाफ़ करें क्या

रोहित जैन
11 6 2017

इंकिशाफ़ – disclosure
एतिराफ़ – confession
इख़्तिलाफ़ – disagreement
इंहिराफ़ – breaking alligence
तवाफ़ – moving around in circle
बर-खिलाफ – Against, opposite to

Published in: on अगस्त 23, 2017 at 8:50 अपराह्न  टिप्पणी करे  

अच्छी बात नहीं है

दिल ज़्यादा ही अच्छा होना अच्छी बात नहीं है
अलग सी दुनिया में यूं खोना अच्छी बात नहीं है

तुम अपना दिल तोड़ के बैठे, उसको समझ नहीं है
औरों के ग़म में ख़ुद खोना अच्छी बात नहीं है

वो वो है, वो नहीं जो तुम हो, कब समझोगे यार
प्यार में उस के हंसना रोना अच्छी बात नहीं है

वुज़ू करें या नहाएं गंगा दिल तो साफ नहीं है
इस दुनिया को समझना सोना अच्छी बात नहीं है

तेरे दिल मे प्यार के पौधे और जहाँ है सेहरा
सेहरा में यूं प्यार को बोना अच्छी बात नहीं है

प्यार उन्हें भी होगा शायद, तेरा प्यार अलग है
किसी के भी पहलू में सोना अच्छी बात नहीं है

रोहित जैन
21/6/2017

Published in: on अगस्त 23, 2017 at 8:46 अपराह्न  टिप्पणी करे  

जाता क्या है

तू क्या है ये तुझको पता है
क्या है गर दुनिया ही ख़फ़ा है

मारे दुनिया तू ना मरेगा
गर तुझको अब भी जीना है

सोच रहा है दुनिया की तू
अच्छा इसने किसको कहा है

क्या खोया है सोचूं क्यूं मैं
जो रह जाए वो अच्छा है

प्यार किया था प्यार किये जा
सोच नहीं के मिलता क्या है

मिलते हैं दुनिया में कितने
तेरे जैसा कौन हुआ है

सब ख़ुश हैं तो ख़ुश हो ‘रोहित’
ऐसा कर के जाता क्या है

रोहित जैन
05-06-2015

Published in: on अगस्त 3, 2015 at 8:04 पूर्वाह्न  Comments (1)  

इस दिल से मजबूर रहूंगा

इस दिल से मजबूर रहूंगा
अब तुमसे कुछ दूर रहूंगा

तुम्हे बनाया है क्या मैंने
सोच के ये मग़रूर रहूंगा

बहुत देख ली रोशनी मैंने
अब कुछ दिन बेनूर रहूंगा

नहीं मिला है कुछ दुनिया से
अब ख़ुद में ही चूर रहूंगा

जब तक हूं महबूस तुम्हारा
तब तक मैं माज़ूर रहूंगा

जब तक इश्क़ का नाम है ‘रोहित’
तब तक मैं मशहूर रहूंगा

रोहित जैन
16-12-2014

Published in: on अगस्त 3, 2015 at 7:57 पूर्वाह्न  टिप्पणी करे  
Tags: ,

हमने तो जाम में उतारा था

हमने तो जाम में उतारा था
वो जो वादा कभी तुम्हारा था

आँख में आँख का नज़ारा था
एक ऐसा भी इस्तिआरा था

तुम जो आए हो तो भला कैसे
हमने अल्लाह को पुकारा था

हमको तन्हाइयों के सहरा में
अश्क़ के आब का सहारा था

जब तुम से नहीं लगा था दिल
वक़्त तब भी यहां गुज़ारा था

आज तक भूलता नहीं ये दिल
कोई सदक़ा कभी उतारा था

हाय शर्माए थे वो देख मुझे
हाय ज़ुल्फ़ों को भी संवारा था

तेरे वादे से ड़र क्यूं लगता है
तब तो सब कुछ मुझे गंवारा था

तुमने टुकड़े उठाये थे जिसके
हाँ मेरा दिल था, पारा पारा था

आज ‘रोहित’ को कौन समझाए
उसके दिल ने ही उसको मारा था

रोहित जैन
13-11-2014

Published in: on अगस्त 3, 2015 at 7:52 पूर्वाह्न  टिप्पणी करे  
Tags: , , , ,

तो बहुत रोया

जब तक चुप था चुप था, रोया तो बहुत रोया
ये दिल जो कभी पत्थर था, टूटा तो बहुत रोया

ऐसी तो नहीं किस्मत कोई हाल अपना पूछे
जब हाल खुद से खुद का, पूछा तो बहुत रोया

जिस शख़्स ने पलटकर जाते हुए न देखा
कल शाम उसने मुझको, देखा तो बहुत रोया

वो शख़्स ज़िंदगीभर जो प्यार बांटता था
जब जब किसी ने दिल को, तोड़ा तो बहुत रोया

वो था बड़ा ही अहमक़ माने था सबको अपना
कोई नहीं मिला जब, अपना तो बहुत रोया

आँखों पे मोहब्बत ने क्या रंग था चढ़ाया
उतरा जो आँख पर से, चश्मा तो बहुत रोया

खुश होके ज़माने को घज़लें सुना रहा था
जब खुद पे लिखने बैठा, नग़मा तो बहुत रोया

क्या मौज सी उठी थी, जिस में हुआ वो तर था
उतरा जो मोहब्बत का, दरिया तो बहुत रोया

जिस पेड़ को उसी ने सींचा था ख़ूं पिलाकर
साये में उसके जाके, बैठा तो बहुत रोया

यूं तो शिकस्त कितनीं खाईं थीं बेचारे ने
हाथों से अपने खुद ही, हारा तो बहुत रोया

ये ज़िंदगी की साज़िश उसको समझ न आई
‘रोहित’ था भोलाभाला, समझा तो बहुत रोया….

रोहित जैन
02-12-2014

सोच नहीं क्या तेरी ख़ता है

आज जो तुझसे दुनिया ख़फ़ा है, सोच नहीं क्या तेरी ख़ता है
मान ले सब से तू ही बुरा है, इस में ही अब तेरा भला है

ये दुनिया तुझको जो समझे, समझे समझे समझे समझे
जो तेरा दिल जान न पाए, उस दुनिया से लेना क्या है

प्यार था जिस से उसने मारा, जीते वो, तू सब कुछ हारा
मौत तेरी जो ख़ुशियां लाए, मर जा फिर तू सोचता क्या है

चाँद नहीं वो ना ही तारे, कालिख़ लाए तेरे प्यारे
अपनी आग को तू ज़िंदा रख, सबकी ख़ातिर क्यूं बुझता है

नाम तेरा उनको ना भाया, तूने था क्यूं नाम कमाया
थे वो बड़े और वो ही बड़े हैं, बन जा छोटा, तू छोटा है

तुझको लगी थी दुनिया सच्ची, तू अच्छा तो दुनिया अच्छी
पर ये दुनिया बहुत बुरी है, तेरा दिल था जो अच्छा है

प्यार किया था, प्यार किये जा, जो दे सकता है वो दिये जा
अपने दिल में झांक तू ‘रोहित’, अच्छा बन ना, क्या तू बुरा है

रोहित जैन
05-06-2015

Published in: on अगस्त 3, 2015 at 7:23 पूर्वाह्न  टिप्पणी करे  
Tags: , , ,