इस दिल से मजबूर रहूंगा

इस दिल से मजबूर रहूंगा
अब तुमसे कुछ दूर रहूंगा

तुम्हे बनाया है क्या मैंने
सोच के ये मग़रूर रहूंगा

बहुत देख ली रोशनी मैंने
अब कुछ दिन बेनूर रहूंगा

नहीं मिला है कुछ दुनिया से
अब ख़ुद में ही चूर रहूंगा

जब तक हूं महबूस तुम्हारा
तब तक मैं माज़ूर रहूंगा

जब तक इश्क़ का नाम है ‘रोहित’
तब तक मैं मशहूर रहूंगा

रोहित जैन
16-12-2014

Published in: on अगस्त 3, 2015 at 7:57 पूर्वाह्न  टिप्पणी करे  
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हमने तो जाम में उतारा था

हमने तो जाम में उतारा था
वो जो वादा कभी तुम्हारा था

आँख में आँख का नज़ारा था
एक ऐसा भी इस्तिआरा था

तुम जो आए हो तो भला कैसे
हमने अल्लाह को पुकारा था

हमको तन्हाइयों के सहरा में
अश्क़ के आब का सहारा था

जब तुम से नहीं लगा था दिल
वक़्त तब भी यहां गुज़ारा था

आज तक भूलता नहीं ये दिल
कोई सदक़ा कभी उतारा था

हाय शर्माए थे वो देख मुझे
हाय ज़ुल्फ़ों को भी संवारा था

तेरे वादे से ड़र क्यूं लगता है
तब तो सब कुछ मुझे गंवारा था

तुमने टुकड़े उठाये थे जिसके
हाँ मेरा दिल था, पारा पारा था

आज ‘रोहित’ को कौन समझाए
उसके दिल ने ही उसको मारा था

रोहित जैन
13-11-2014

Published in: on अगस्त 3, 2015 at 7:52 पूर्वाह्न  टिप्पणी करे  
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तो बहुत रोया

जब तक चुप था चुप था, रोया तो बहुत रोया
ये दिल जो कभी पत्थर था, टूटा तो बहुत रोया

ऐसी तो नहीं किस्मत कोई हाल अपना पूछे
जब हाल खुद से खुद का, पूछा तो बहुत रोया

जिस शख़्स ने पलटकर जाते हुए न देखा
कल शाम उसने मुझको, देखा तो बहुत रोया

वो शख़्स ज़िंदगीभर जो प्यार बांटता था
जब जब किसी ने दिल को, तोड़ा तो बहुत रोया

वो था बड़ा ही अहमक़ माने था सबको अपना
कोई नहीं मिला जब, अपना तो बहुत रोया

आँखों पे मोहब्बत ने क्या रंग था चढ़ाया
उतरा जो आँख पर से, चश्मा तो बहुत रोया

खुश होके ज़माने को घज़लें सुना रहा था
जब खुद पे लिखने बैठा, नग़मा तो बहुत रोया

क्या मौज सी उठी थी, जिस में हुआ वो तर था
उतरा जो मोहब्बत का, दरिया तो बहुत रोया

जिस पेड़ को उसी ने सींचा था ख़ूं पिलाकर
साये में उसके जाके, बैठा तो बहुत रोया

यूं तो शिकस्त कितनीं खाईं थीं बेचारे ने
हाथों से अपने खुद ही, हारा तो बहुत रोया

ये ज़िंदगी की साज़िश उसको समझ न आई
‘रोहित’ था भोलाभाला, समझा तो बहुत रोया….

रोहित जैन
02-12-2014

ये अपने बीच जो किस्सा बना है

ये अपने बीच जो किस्सा बना है
कोई रिश्ता भी है या बस अना है

मुझे मारा है तुमने रौंदकर यूँ
हैं उजले हाथ लेकिन पा सना है

मै झुककर लो ज़मीं तक आ गया हूँ
मगर वो है के वो अब तक तना है

मै दुश्मन तो कभी कहता नहीं था
मगर अब यार भी कहना मना है

मोहब्बत तर्क़ करना सीख् लूँगा
मगर इस वक़्त तो दिल आशना है

ख़ुदा थे तुम कभी पर अब नहीं हो
हाँ इक बुत से अभी तक सामना है

वो ही चेहरा दिखे सौ बार ‘रोहित’
ये टूटा दिल भी कैसा आईना है

रोहित जैन
29-12-2014

Published in: on जनवरी 4, 2015 at 6:41 अपराह्न  टिप्पणी करे  

उनको मैंने अपना माना

उनको मैंने अपना माना हाँ ये मैंने भूल करी
जान जलाकर मैंने अपनी आज ये भूल क़बूल करी

कोई फूल गुलाब का मिलता तो फिर कोई बात भी थी
खून बहाया मुफ़्त में हमने और ये ज़ीस्त बबूल करी

उसको पाया दुनिया पाई सोच के दाँव लगा बैठे
खुदको खोया दुनिया खोई और ज़िन्दगी धूल करी

जान लुटाई दिल भी लुटाया होश ही यार गंवा बैठे
अश्क़ बहाकर और ग़म खाकर दीवानगी वसूल करी

हद ही कर दी रोहितजी ने खुद ही खुद को भूल गए
अपने उसूलों पर जीते थे, ज़िन्दगी बेउसूल करी

रोहित जैन
28-11-2014

Published in: on जनवरी 4, 2015 at 6:31 अपराह्न  टिप्पणी करे