नज़्म – उसकी छुअन

नज़्म – उसकी छुअन

“रोहित” से पूछते हो किन हालों की तरह छुआ
खुशियों की तरह छुआ, वबालों की तरह छुआ

उसने मेरे अंधेरों को उजालों की तरह छुआ
एक पारसा को ख़ुदा पे सवालों की तरह छुआ

कभी ख्वाब बनके छुआ, ख़यालों की तरह छुआ
चेहरे पे आके बिखरते बालों की तरह छुआ

हक़ीक़त की तरह छुआ, हवालों की तरह छुआ
अफ़वाह सा छुआ और मिसालों की तरह छुआ

धूप-ए-हयात को उसने सर्द गालों की तरह छुआ
बंजर ज़मीं को फ़लभरी ड़ालों की तरह छुआ

मुफ़लिस के हाथ आ गए मालों की तरह छुआ
कभी उसने मुझे शतरंज की चालों की तरह छुआ

जादू के किसी खेल के कमालों की तरह छुआ
हर्फ़-ए-तलब को रंग-ए-मलालों की तरह छुआ

मै कैद हो के रह गया, मुझे जालों की तरह छुआ
कभी मुख़्तसर सा छू लिया कभी मुहालों की तरह छुआ

नाज़ुक अदा से हुस्न-ए-जमालों की तरह छुआ
सूखी सी पत्तियों को मशालों की तरह छुआ

पल की तरह छुआ मुझे, सालों की तरह छुआ
हिज्र सा भी छुआ और विसालों की तरह छुआ

मस्जिदों की तरह छुआ, शिवालों की तरह छुआ
“रोहित” से पूछते हो किन हालों की तरह छुआ

रोहित जैन
01-11-2010

Published in: on नवम्बर 16, 2010 at 4:05 पूर्वाह्न  Comments (2)  
Tags: , , , , , , , , , , ,

The URI to TrackBack this entry is: https://rohitler.wordpress.com/2010/11/16/nazm-uski-chhuan/trackback/

RSS feed for comments on this post.

2 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. पूरी गज़ल लाजवाब है
    मुफ़लिस के हाथ आ गए मालों की तरह छुआ
    कभी उसने मुझे शतरंज की चालों की तरह छुआ
    बाह बहुत खूब
    पल की तरह छुआ मुझे, सालों की तरह छुआ
    हिज्र सा भी छुआ और विसालों की तरह छुआ

    मस्जिदों की तरह छुआ, शिवालों की तरह छुआ
    “रोहित” से पूछते हो किन हालों की तरह छुआ
    कमाल के शेर हैं। अच्छी गज़ल के लिये बधाई

  2. बहुत खूब।


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: