ग़म बढ़ा, बढ़ता गया, बेइन्तिहां होता गया

ग़म बढ़ा, बढ़ता गया, बेइन्तिहां होता गया
फ़ासिला सा जब हमारे दर्मियां होता गया

क्या करें इस हिज्र के आलम में हम जाएं कहां
साँस लेना भी अगर्चे इम्तिहां होता गया

क्यों ना टपके खून आँखों से, ज़हन से, जिस्म से
जज़्बा-ए-दिल प्यार में जब खूंचकां होता गया

हमने मांगा जब सनम से – क्यूं लुटा दिल – ये जवाब
वो ये कहते हैं के ये तो खामखां होता गया

किस से मांगें हम दुआ, किस से करें फ़रियाद हम
जब ज़माने सा ही दुश्मन आसमां होता गया

नामुरादी रफ़्ता रफ़्ता ये कहां लाई हमें
ख़ुद को अपने ही न होने का गुमां होता गया

इस तरह अहलेजहां में हो गया हूँ बेवक़त
तालिबानों के वतन में बामियां होता गया

जो भी मिलता है खरीदारों सा तकता है हमें
इश्क़ की कीमत लगी और दिल दुकां होता गया

जैसे ही हमने सनम को दे दिया दर्ज़ा-ए-ख़ुदा
ग़म इबादत हो गए, रोना अज़ां होता गया

अब तरसती हैं ये आँखें, ऐ क़यामत आ भी जा
अब तो जीना और मरना एक जां होता गया

ये हुजूमे दर्द जो रखा है सीने में कहीं
इसमें ‘रोहित’ खो गया और बेनिशां होता गया

रोहित जैन
11-06-2010

अगर्चे = If
खूंचकां = Dripping blood
अहलेजहां = People of the world
बेवक़त = Valueless

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13 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. रोचक …..

  2. No words…
    जो भी मिलता है खरीदारों सा तकता है हमें
    इश्क़ की कीमत लगी और दिल दुकां होता गया
    Kya baat hai !!

  3. बहुत खूब!

  4. बहुत सुन्दर।

  5. waah bahut sundar

  6. बहुत बडिया । शुभकामनायें

  7. जो भी मिलता है खरीदारों सा तकता है हमें
    इश्क़ की कीमत लगी और दिल दुकां होता गया…….

    dil ki keemat lagi aur ishq dukka hota gaya……mujhse baar-2 yehi pada jaata hai….pata nahi kyun……but bahut badhiya ….as usual…!

  8. bahut acche sher hai…

  9. इस तरह अहलेजहां में हो गया हूँ बेवक़त
    तालिबानों के वतन में बामियां होता गया
    bahut khoob. umda rachna..

  10. बहुत बेहतरीन। दिल से निकले अल्फाज़ लग रहे हैं।

    ग़म बढ़ा, बढ़ता गया, बेइन्तिहां होता गया
    फ़ासिला सा जब हमारे दर्मियां होता गया

  11. bahut khoob. dil ke bheetar tak utar gayi.

  12. जो भी मिलता है खरीदारों सा तकता है हमें
    इश्क़ की कीमत लगी और दिल दुकां होता गया

    bahut khoob rohit bhai kya khyaal hai

  13. NICE LINES ROHIT JI


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