कोई शम्मा सी झिलमिलाती है

आस बंधती है टूट जाती है
ज़िंदगी खेल यूँ दिखाती है

देख ज़ालिम के तेरे नाम से अब
सारी दुनिया मुझे सताती है

दिल पे रहता नहीं मेरा काबू
जब तेरी याद मुझको आती है

तू जहाँ देख ले नज़र भर के
वहाँ किस्मत भी मुस्कुराती है

खोई खोई सी तेरी आँखों में
ज़िंदगी झूम झूम जाती है

याद आ आ के मेरे ख़्वाबों में
तेरी तस्वीर ही बनाती है

तेरी नज़रों की मैफ़रोशी की
दास्तां मैक़शी सुनाती है

तुझसे कहनी थी जो भी बात मुझे
सामने तेरे भूल जाती है

‘रोहित’ क्या जला तेरे दिल में
कोई शम्मा सी झिलमिलाती है

रोहित जैन
02-02-2009

Published in: on फ़रवरी 24, 2009 at 7:32 अपराह्न  Comments (4)  

The URI to TrackBack this entry is: https://rohitler.wordpress.com/2009/02/24/koi-shamma-si/trackback/

RSS feed for comments on this post.

4 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. bahut khub janab. narayan narayan

  2. तुझसे कहनी थी जो भी बात मुझे
    सामने तेरे भूल जाती है

    ‘रोहित’ क्या जला तेरे दिल में
    कोई शम्मा सी झिलमिलाती है

    waah bade dino baad aapki lajawaab gazal padhne mili,behad sundar .

  3. ‘रोहित’ क्या जला तेरे दिल में
    कोई शम्मा सी झिलमिलाती है

    maja aa gaya bhaijaan.
    Is baar jara “jor” kam tha par fir bhi shamma to jhilmila hi rahi hai🙂

  4. लाजवाब!


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: