फूल पत्थर पर खिलाकर देखिये

फूल पत्थर पर खिलाकर देखिये
बूँद् में सागर छिपाकर देखिये

कितना आसां है जहां को कोसना
ख़ुद से ख़ुद को ही लड़ाकर देखिये

हाथ ही अब तक मिलाते तुम रहे
दिल से अब दिल को मिलाकर देखिये

कितने खुश हो मुज़लिमों को लूटकर
अपनी दुनिया को लुटाकर देखिये

आप जो औरों से कहते हैं करो
आप भी इक मर्तबा कर देखिये

इस जहां से आप करते हैं सवाल
अपना ईमां भी जगाकर देखिये

आज तक सब की दुआ लेते रहे
आप भी कोई दुआ कर देखिये

कब तलक ओढ़े रहोगे चाँदनी
थोड़ी कालिख भी लगाकर देखिये

पास जब तेरे तेरी माँ की दुआ
तो ख़ुदा को आज़माकर देखिये

बस करो रोना ये हर इक बात पर
दर्द को अपनी दवा कर देखिये

फ़ैसला ये वक़्त कर देगा मियां
मत इसे यूँ मुँह चुराकर देखिये

वो ख़ुदा सुन लेगा तेरी भी दुआ
हाथ बस दिल से उठाकर देखिये

आँसुओं का मोल मोती है जनाब
आप दो बूँदें गिराकर देखिये

अब तलक समझा मुक़द्दर को ख़ुदा
अब तो ‘रोहित’ ख़ूं जलाकर देखिये

रोहित जैन
02-11-2008

 
 
 
Published in: on नवम्बर 28, 2008 at 6:44 अपराह्न  Comments (4)  

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4 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. कब तलक ओढ़े रहोगे चाँदनी
    थोड़ी कालिख भी लगाकर देखिये

    पास जब तेरे तेरी माँ की दुआ
    तो ख़ुदा को आज़माकर देखिये

    waah bahut sundar

  2. bahut sundar

  3. वाहवा
    बधाई के योग्य शेर कहे हैं आपने
    साधुवाद

  4. some of the amazing lines i have read online, and still better usage of urdu which is rarity in itself now days…


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