खतरे में है

कोई नहीं ये जानता के वो कब खतरे में है
ज़िंदगी जीने का देखो हर सबब खतरे में है

कोई यहां मंदिर को तोड़े, कोई ढ़ाए मस्जिदें
क्या ज़माना आ गया है अब तो रब खतरे में है

सोचते थे के यहां कानून है, बच जायेंगे
एक थी उम्मीद लेकिन वो भी अब खतरे में है

अब किसी की आँख में हैं चैन की नींदें कहां
दिन भी खतरों से भरा था और शब खतरे में है

वो शरीक-ए-जुर्म है तो फ़िक़्र वो फिर क्यों करे
जिसकी कोई ख़ता नहीं वो बेसबब खतरे में है

अब सभी को नाम लेकर सब बुलाते हैं यहां
बदले ज़माने में पुराना हर अदब खतरे में है

क्या रखें उम्मीद अब हम यार-रिश्तेदार से
क्या मदद उस से मिलेगी वो ही जब खतरे में है
रोहित जैन
23-03-2008

Published in: on मार्च 24, 2008 at 11:59 पूर्वाह्न  Comments (3)  
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3 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. क्या रखें उम्मीद अब हम यार-रिश्तेदार से
    क्या मदद उस से मिलेगी वो ही जब खतरे में है

    bahut sundar bhai abhaar

  2. कोई यहां मंदिर को तोड़े, कोई ढ़ाए मस्जिदें
    क्या ज़माना आ गया है अब तो रब खतरे में है

    Meaning Full. Nice one

  3. what a saeri accha he


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