इक दिन खुद को तोड़ के देखो
सारे बंधन छोड़ के देखो
जिनकी राह तका करते हो
खुद ही उन तक दौड़ के देखो
अलग अलग तुम क्यों रहते हो
दिल से दिल को जोड़ के देखो
इन राहों से बचते हो तुम
इन राहों को मोड़ के देखो
सब ग़म इक पल में भागेंगे
माँ की बाहें ओढ़ के देखो
कितना कुछ बेकार भरा है
दिल की गागर फोड़ के देखो
सब के ईमां सोए से हैं
दुनिया को झिन्झोड़ के देखो
तुम्हे शिकायत है दुनिया से
‘रोहित’ ज़हन निचोड़ के देखो
रोहित जैन
30-10-2010
इन राहों से बचते हो तुम
इन राहों को मोड़ के देखो
दमदार।