2 हमरदीफ़ ग़ज़लें

हो तेरी इनायत तो मोहब्बत निभा सकूँ
दो फूल तेरी ज़ुल्फ़ में मै भी सजा सकूँ

कैसा तेरा जादू है के तेरे विसाल में
नज़दीक आ सकूँ न ही मै दूर जा सकूँ

पलकें झुका के कैसा अजब कर लिया पर्दा
ना देख सकूँ पार ना इसको उठा सकूँ

ये नहीं कहता हूँ के लौट आए गया वक़्त
इतना ही बहुत है के तुम्हे याद आ सकूँ

तू देख ले मुझको के करम ये ही बहुत है
कोसों की बात है के हालेदिल सुना सकूँ

इतनी सी दुआ मान ले ‘रोहित’ की ऐ ख़ुदा
उनको गले लगा के मै अपना बना सकूँ

————————————–
हो मेरी भी क़िस्मत के तेरे काम आ सकूँ
ऐ मेरे वतन जान भी तुझ पे लुटा सकूँ

लाखों का खून वतन की मिट्टी में लगा है
मेरा भी हो नसीब दो क़तरे गिरा सकूँ

जिन दीमकों ने खोखली कर दी तेरी बुनियाद
हो मुझ में वो हुनर के मै उनको मिटा सकूँ

तेरे सभी बच्चे जो हैं मुफ़लिस-ओ-ग़मज़दां
इतना ख़ुलूस हो के उन्हे मै हँसा सकूँ

कर दे अता ‘रोहित’ को ख़ुदा इतनी सी तौफ़ीक़
हर शख़्स को वतन के मै अपना बना सकूँ

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Published in: on जुलाई 24, 2009 at 12:58 पूर्वाह्न  Comments (10)  

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10s टिप्पणियाँLeave a comment

  1. दोनों ही गज़लें-बहुत उम्दा!!

  2. ये नहीं कहता हूँ के लौट आए गया वक़्त
    इतना ही बहुत है के तुम्हे याद आ सकूँ

    तू देख ले मुझको के करम ये ही बहुत है
    कोसों की बात है के हालेदिल सुना सकूँ

    waah bahut khub,dono gazal lajawab.

  3. khoobsoorat ghazalen………..
    shaandaar ghazalen…….
    ___________badhaai !

  4. लाजवाब हैं आपकी दोनों ग़ज़लें……… कमाल का लिखते हैं आप………

  5. Rohit, I’ve always relished reading your ‘Shayari’, and have found them getting better. I really loved these Ghazals. God Bless!

  6. BAHUT ACHCHHA LIKHEN HAI. WEST OF LUCK.

    इतनी सी दुआ मान ले ‘रोहित’ की ऐ ख़ुदा
    उनको गले लगा के मै अपना बना सकूँ

  7. जिन दीमकों ने खोखली कर दी तेरी बुनियाद
    हो मुझ में वो हुनर के मै उनको मिटा सकूँ

    कर दे अता ‘रोहित’ को ख़ुदा इतनी सी तौफ़ीक़
    हर शख़्स को वतन के मै अपना बना सकूँ

    bahut acche hai…
    khud mein hausla sa lagta hai

  8. rohitji! dono hi ghazale badhiyaa hain. doosri wali kuchh jyada achchi lagi mujhe. ek aur baat… aap tarakki ki raah pe hain.

    badhai aur shubhkamnaaye.

  9. Aapki dono gazale bahut sundar hai. Inme gaharaai ke sath sandesh bhi hai evam pyar ka ahsas bhi.

    Anil Shrivas
    Kasrawad, Distt Khargone (M.P.)

  10. very nice


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