दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर

हार जाने की कामरानी पर               
दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर

आपने दिल मेरा जो तोड़ा है
शुक्र करता हूँ मेहरबानी पर

कुछ निशां देखता हूँ मै अपने
आपकी बेनिशां निशानी पर

लुत्फ़ क्या क्या मिला है क्या बोलूं
ज़ायकेमर्ग़ेनागहानी पर                   

जो अभी तक नहीं कही तुमने
रो रहा हूँ उसी कहानी पर

लो छाँव अब शजर ने मांगी है        
शम्स की सोज़ेबेकरानी पर            

लो अहमकाना हो गई है ख़िरद       
लो इश्क़ आ गया रवानी पर

ये इश्क़ है या है फ़रेबेक़ज़ा         
बात अटकी है दर्मियानी पर

निसार जानोदिल किये हमने
तेरी नज़रों की हुक्मरानी पर        

अहलेदुनिया है और है ‘रोहित’        
कैसा उतरा है तुर्कमानी पर         

रोहित जैन
11-11-2008

कामरानी = Success
ज़ायका – Pleasure
मर्ग़-ए-नागहानी – Sudden Death
शजर – Tree
शम्स – Sun
सोज़ – Heat
बेकरानी – Limitless/unbound
अहमकाना – Foolish
ख़िरद – Wisdom
फ़रेबेक़ज़ा – Illusion of Death
हुक्मरानी – Rule
अहलेदुनिया – People of the world
तुर्कमानी – Rebel

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5 Comments Leave a comment.

  1. निसार जानोदिल किये हमने
    तेरी नज़रों की हुक्मरानी पर हुक्मरानी – Rule

    अहलेदुनिया है और है ‘रोहित’ अहलेदुनिया – People of the world
    कैसा उतरा है तुर्कमानी पर
    waah gazab,shabdon ka arth batana achha laga

  2. ये इश्क़ है या है फ़रेबेक़ज़ा
    बात अटकी है दर्मियानी पर

    bahut sundar

  3. अहलेदुनिया है और है ‘रोहित’
    कैसा उतरा है तुर्कमानी पर

    Amazing boss!!!

  4. लो अहमकाना हो गई है ख़िरद
    लो इश्क़ आ गया रवानी पर

    ये इश्क़ है या है फ़रेबेक़ज़ा
    बात अटकी है दर्मियानी पर..
    kya baat hai!!bahut acchhey…

  5. मखता तो कमाल का लिखा है आपने ..
    बहोत खूब साहब ..
    ढेरो बधाई आपको….


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