सुना है अफ़साना

इशरत का सुना है अफ़साना हैरत का सुना है अफ़साना
चाँद सितारों से तेरी सूरत का सुना है अफ़साना

लोगों ने सुने हैं वाइज़ से किताबी क़यामत के किस्से
हमने तेरी निगाहों की राहत का सुना है अफ़साना

तू घबराई तू शरमाई जो हमको तकते देख लिया
आँखों ने जो कर दी उस जुर्रत का सुना है अफ़साना

ख़ारों से गुल्ज़ारों का और खिज़ा से खिली बहारों का
दोज़ख के वाशिंदों से जन्नत का सुना है अफ़साना

नींदों में मीठे ख्वाबों का और साँसों के सैलाबों का
दिल में होनेवाली हर आहट का सुना है अफ़साना

वो लैला लैला करता था वो मजनू मजनू कहती थी
हम ने भी उन दोनों की उल्फ़त का सुना है अफ़साना

संग-सफ़ेद का टुकड़ा वो पैमान-ए-मोहब्बत है यारों
ताज-ए-मोहब्बत की हमने तुरबत का सुना है अफ़साना

रोहित जैन
16-01-2008

तुरबत = Tomb

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4 Comments Leave a comment.

  1. संग-सफ़ेद का टुकड़ा वो पैमान-ए-मोहब्बत है यारों
    ताज-ए-मोहब्बत की हमने तुरबत का सुना है अफ़साना

    wah behad khubsurat

  2. बहुत सुन्दर, रोहित भाई.

  3. shandaar prayog…

  4. आज स्वतंत्रता दिवस आयिए इस बेला पर पूरे देश को आवाज़ लगाये की ग़रीबी और भुखमरी और नहीं रहने देंगे! आज़ादी के मायने नहीं बदलने देंगे! छोटे बड़ों से मार्गदर्शन लेंगे!

    शुभकामनाएं!


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