आज तक उन खुशबुओं का सिलसिला तोड़ा नहीं

आज तक उन खुशबुओं का सिलसिला तोड़ा नहीं
दिल अपना जलाया मगर उसका दिल तोड़ा नहीं

तुम भी देके देख लो, ग़म से मै ड़रता नहीं
जैसी भी रही ज़िंदगी मुँह कभी मोड़ा नहीं

रात कि महफ़िल सजी थी, चाँद का गिलास था
ग़म पिये तो क्या हुआ पर वो मज़ा छोड़ा नहीं

ये भी क्या सवाल है के इश्क़ कितना चाहिये
दिल तो बच्चे की तरह है, सब मिले थोड़ा नहीं

ये इश्क़ का तूफ़ान है, कोई सलामत ना रहा
जानता था मै भी ये पर नाव को मोड़ा नहीं

अब तो ‘रोहित’ को बताओ अस्ल में लिक्खा था क्या
आज तक समझा नहीं, पुर्ज़ों को भी जोड़ा नहीं

रोहित जैन
24-04-2008

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6 Comments Leave a comment.

  1. बहुत खूबसूरत ,नज्म हिन्दी में है पर अल्फाज़ उर्दू के…

  2. ये इश्क़ का तूफ़ान है, कोई सलामत ना रहा
    जानता था मै भी ये पर नाव को मोड़ा नहीं

    bahut khubsurat

  3. bahut umda soch pai hai dost thoda gunaah aur karo ishk main, vajan bhi aa hi jayega. ummed hai pyar shayar jarur bana deta hai aapko avval bana dega

  4. laakh koshihs kar muje bhula na paoge kajal

  5. ये इश्क़ का तूफ़ान है, कोई सलामत ना रहा
    जानता था मै भी ये पर नाव को मोड़ा नहीं

  6. आज तक उन खुशबुओं का सिलसिला तोड़ा नहीं
    दिल अपना जलाया मगर उसका दिल तोड़ा नहीं


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