ज़िंदगी पास खींच लाएगी
इक न इक आस खींच लाएगी
तुझे भी एक दिन इस कुँए तक
तेरी ही प्यास खींच लाएगी
दुआ दिल की कबूल जब होगी
मरते में साँस खींच लाएगी
हालात की तल्ख़ी देखना तुझको
ख़ुदा के पास खींच लाएगी
मेरी याद तुझे मुझ तक
करके उदास खींच लाएगी
मेरी मोहब्बत आवाज़ जब देगी
तुझे बदहवास खींच लाएगी
चमन तक तुझे भी इक दिन
गुलों की बास खींच लाएगी
‘रोहित’ की ग़ज़ल तक तुझको
बात कुछ खास खींच लाएगी
रोहित जैन
23-04-2008
तुझे भी एक दिन इस कुँए तक
तेरी ही प्यास खींच लाएगी
बेहद उम्दा गज़ल..
*** राजीव रंजन प्रसाद
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