और नहीं

मरने की दुआ दे दो हमको जीने का तमाशा और नहीं
इस रंज मुसीबत ग़म से भरी दुनिया की तमन्ना और नहीं

साहिल पे अड़े तूफ़ानों के सहता हूं थपेड़े मुद्दत से
अब हार गया हूं दुनिया से कश्ती ये शिकस्ता और नहीं

अश्क़ गिराये थे हमने के दिल की आग बुझायेंगे
आग नई इन अश्क़ों से हर बार लगाना और नहीं

दुनिया समझी है हमको और हम भी समझ गए दुनिया
अब दानिशमंदी कहती है के दुनिया दुनिया और नहीं

दिल के टुकड़ों को हौले से अब जोड़ा है, समझाया है
अब ग़म तो क्या ज़िक्रेग़म भी इस दिल को गंवारा और नहीं

था चाक जिगर मोहताजेरफ़ू मुश्किल से छुपे हैं छेद सभी
अब ठानी है हमने दिल में ये शौकेबहारां और नहीं

हम क़त्ल हुए हैं पहले ही इक बार नहीं सौ बार यहां
अश्क़ों की ज़बां से आती उन आहों का इशारा और नहीं

आहें देखीं रुसवाई भी अश्क़ों से भरी तन्हाई भी
सब देख चुका हूं दुनिया में इक और नज़ारा और नहीं

उस दिन के लिये ‘रोहित’ सह ली ज़ुल्मत सारी इस दुनिया की
जो होना हो अब हो जाये, अब ख़ौफ़-ए-ख़ुदाया और नहीं
रोहित जैन
16-04-2008

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  1. On April 17, 2008 at 6:36 am समीर लाल Said:

    बेहतरीन!!!

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