क्यों नहीं जाता

ये ज़ख़्म-ए-जुदाई मेरा भर क्यों नहीं जाता
वो शख़्स मेरे दिल से उतर क्यों नहीं जाता

कब तक रहूं हैरान परेशान हर घड़ी
वो शख़्स कोई फ़ैसला कर क्यों नहीं जाता

क्यों मेरे ही पहलू में ये आता है लौटकर
ये ग़म ज़रा पूछो के उधर क्यों नहीं जाता

हर बार मेरे ज़ेहन में बस वो ही इक ख़याल
चाहूं भुलाना लाख मगर क्यों नहीं जाता

पहले तो कभी खोने का तुझको था ड़र मुझे
अब तेरे कहीं मिल जाने का ड़र क्यों नहीं जाता

क्या क्या जुड़ीं है याद क़यामत सी उस जगह
बस मै ही जानता हूं मै घर क्यों नहीं जाता

क्यों साँस ले रहा है वो बेजान रूह में
कह दो ज़रा ‘रोहित’ से के मर क्यों नहीं जाता

रोहित जैन
09-03-2008

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4 Comments Leave a comment.

  1. gazal bahut sundar hai,rohitji,bas marne ki bate na karen,lambi aayu ke shuaashi ke saath.

  2. This is some of the best (self written) Hindi/Urdu Poetry I read on any Hindi blog. Though Nida Fazli’s impression is clearly visible on this one but you have blended it perfectly with your own feelings. Its a treat to read. Kudos to you. Please keep them coming.

  3. Very Good & Nice Gajal
    Thankx

  4. कब तक रहूं हैरान परेशान हर घड़ी
    वो शख़्स कोई फ़ैसला कर क्यों नहीं जाता

    क्यों मेरे ही पहलू में ये आता है लौटकर
    ये ग़म ज़रा पूछो के उधर क्यों नहीं जाता

    हर बार मेरे ज़ेहन में बस वो ही इक ख़याल
    चाहूं भुलाना लाख मगर क्यों नहीं जाता

    पहले तो कभी खोने का तुझको था ड़र मुझे
    अब तेरे कहीं मिल जाने का ड़र क्यों नहीं जाता

    क्या क्या जुड़ीं है याद क़यामत सी उस जगह
    बस मै ही जानता हूं मै घर क्यों नहीं जाता

    Beautifully written :)


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