हम भी जिगर पे इख़्तियार रख लेंगे

हम भी जिगर पे इख़्तियार रख लेंगे
बंद आँखों में छुपा के प्यार रख लेंगे

एक पल क्या है तू जो कह दे तो
तमाम उम्र का हम इंतज़ार रख लेंगे

तेरी रुसवाई जो हो हमसे बात करने में
तुझे मिलेंगे और दिल को मार रख लेंगे

जो मन्नतें दैर-ओ-हरम की फलतीं हों
एकाध क्या है हम मन्नत हज़ार रख लेंगे

बस एक बार उठा दे ज़रा तू रुख़ से नक़ाब
उस एक याद से उम्र-ए-क़रार रख लेंगे

रोहित जैन
26-02-2008

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One Comment Leave a comment.

  1. अच्छे शेर हैं रोहित साहब.
    “तेरी रुसवाई जो हो हमसे बात करने में
    तुझे मिलेंगे और दिल को मार रख लेंगे”
    बहुत बढ़िया.


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