This is a poem I wrote for my Ma on her Birthday.
She cried reading it just the way I had cried while writing the poem.
Even my Dad was into tears on reading this poem.
I bet anyone who loves his/her mother and family is bound to cry on this.
Please post replies and let me know your views on this one.
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मै रोया यहां दूर देस वहां भीग गया तेरा आंचल
तू रात को सोती उठ बैठी हुई तेरे दिल में हलचल
जो इतनी दूर चला आया ये कैसा प्यार तेरा है मां
सब ग़म ऐसे दूर हुए तेरा सर पर हाथ फिरा है मां
जीवन का कैसा खेल है ये मां तुझसे दूर हुआ हूं मै
वक़्त के हाथों की कठपुतली कैसा मजबूर हुआ हूं मै
जब भी मै तन्हा होता हूँ, मां तुझको गले लगाना है
भीड़ बहुत है दुनिया में तेरी बाहों में आना है
जब भी मै ठोकर खाता था मां तूने मुझे उठाया है
थक कर हार नहीं मानूं ये तूने ही समझाया है
मै आज जहां भी पहुंचा हूँ मां तेरे प्यार की शक्ति है
पर पहुंचा मै कितना दूर तू मेरी राहें तकती है
छोती छोटी बातों पर मां मुझको ध्यान तू करती है
चौखट की हर आहट पर मुझको पहचान तू करती है
कैसे बंधन में जकड़ा हूँ दो-चार दिनों आ पाता हूँ
बस देखती रहती है मुझको आँखों में नहीं समाता हूँ
तू चाहती है मुझको रोके मुझे सदा पास रखे अपने
पर भेजती है तू ये कह के जा पूरे कर अपने सपने
अपने सपने भूल के मां तू मेरे सपने जीती है
होठों से मुस्काती है दूरी के आंसू पीती है
बस एक बार तू कह दे मां मै पास तेरे रुक जाऊंगा
गोद में तेरी सर होगा मै वापस कभी ना जाऊंगा
रोहित जैन
19-03-2006
Awesome..
i don’t have any words..
बहुत सुन्दर भाव भरी कविता है.. संसार भर की मांओं का यही हाल है…. अपने प्रिय बेटे से दूरी कैसे सहती है.. उसका दिल ही जानता है.
बधाई
बस एक बार तू कह दे मां मै पास तेरे रुक जाऊंगा
गोद में तेरी सर होगा मै वापस कभी ना जाऊंगा
–कहने की जरुरत नहीं गर माँ के दिल की आवाज सुनो. एक भावपूर्ण रचना के लिये बधाई.
bahut sundar,bhavuk kar dene wali kavita hai,maa ka pyar,mamta kahi bhi pahunchne ki shkamata rakhti hai,bahut sundar,great feelings.
भावभीनी रचना… और जहाँ माँ का ज़िक्र हो… आँचल आँसू से न गीला हो…कैसे हो सकता है…. बहुत सुन्दर… ममता भरी कविता !
शब्दों और भाव का अदभुत मिश्रण है।माँ इस एक शब्द मे बहुत ताकत है।
ultimate touching one
Too Good hai Sir !
कैसे बंधन में जकड़ा हूँ दो-चार दिनों आ पाता हूँ
बस देखती रहती है मुझको आँखों में नहीं समाता हूँ
Waah !
लोग कहते हैं की भगवान हर स्थान पर उपस्थित नहीं हो सकता था इसलिए उसने माँ को बनाया पर आज कुछ बदल सा गया है
माँ अब जब हमारे साथ नहीं होती इसलिए भगवान को साथ कर देती है अपनी दुआयों से | कविता में पूरा भाव वही है, बहुत अच्छा लिखा है रोहित जी, बधाई !!
relly nice rohit ji i don,t have any word about this poem …..
It’s really too good …
Bahut kuch likha hai.
I have no words to express how did i feel after reading this…
We need such kind of poetry in our real life. Thanks Rohit..
Good Luck…
जो इतनी दूर चला आया ये कैसा प्यार तेरा है मां
सब ग़म ऐसे दूर हुए तेरा सर पर हाथ फिरा है मां
बहोत ग़हराइ से ये लिखा होगा आपने।
अभिनंदन।
Bahut hi badiya, Rohit jee.
बस एक बार तू कह दे मां मै पास तेरे रुक जाऊंगा
गोद में तेरी सर होगा मै वापस कभी ना जाऊंगा
Awesome lines
माँ तेरी गोद मैं सर रखकर अब सोने को दिल करता है,
उस आँचल की छाँव मैं सब कुछ खोने को दिल करता है …..
उन अनकही बातों से भरी उन आँखों ने जब रोका था,
मुझको अब उन बातों को फ़िर सुनने को दिल करता है,
संसार की अभी आदरणीय माँओं को उनके इस निस्वार्थ त्याग के लिए सादर प्रणाम….
और आपको इस अनमोल रचना के लिए बधाई भी …..
– गौरव मिश्र [Gaurav Mishra]
beautiful poem…gud work dude…