बेबाक हुस्न देखा तेरी क़ज़-अदाएं देखीं
एक पल में ही जहाँ की सारी बलाएं देखीं
कभी आसमां में इतने बादल नहीं थे देखे
ज़ुल्फ़ों में तेरी हमने जितनी घटाएं देखीं
उनकी वफ़ाओं का बस मुक़ाबिला नहीं है
यूँ तो जहाँ में हमने कितनी वफ़ाएं देखीं
तो अंजुमन से गुज़री तो क्या चलाया जादू
बदलीं सीं अंजुमन की सारी हवाएं देखीं
हया ऐसे उतरी उसके मासूम रुख़ पे देखो
फूलों की सुर्ख़ लाली जैसी क़बाएं देखीं
वो रूठे तो दिल पे गुज़री क्या-क्या के क्या बतायें
दुनिया जहाँ की हमने सारी सज़ाएं देखीं
कुछ ना बोला लबों से, निगाहें झुका लीं
नज़रों से जो हुईं थीं बस वो ख़तायें देखीं
रोहित जैन
21-02-2008