आज तक समझा नहीं मै क्यों गया तू छोड़कर
क्या कमी थी प्यार में रिश्ते गया सब तोड़कर
देख तू आ के ज़रा मेरी किताब-ए-ज़िंदगी
जिस जिस पे तेरा नाम वो पन्ना रखा है मोड़कर
एक शब जाती नहीं जब याद तू आता नहीं
आज भी सोता हूँ मै ख़्वाबों में तुझ को ओढ़कर
आज भी उम्मीद है के तू कहीं मिल जायेगा
और लगा लूंगा तुझे सीने से अपने दौड़कर
रोहित जैन
15-02-2008
एक शब जाती नहीं जब याद तू आता नहीं
आज भी सोता हूँ मै ख़्वाबों में तुझ को ओढ़कर
” bhut sunder,loved ur poetry”
देख तू आ के ज़रा मेरी किताब-ए-ज़िंदगी
जिस जिस पे तेरा नाम वो पन्ना रखा है मोड़कर
आज भी उम्मीद है के तू कहीं मिल जायेगा
और लगा लूंगा तुझे सीने से अपने दौड़कर
bahut khub