ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो

ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो
भरी तन्हाई में मुझे कुछ दूर थाम लो

तुम्हारे नाम से मुझको ज़माना जाने है
हो न जाऊं कहीं मै मग़रूर थाम लो

जो दिलों को दिलों से करता है अलग
तुम ज़माने का वो इक दस्तूर थाम लो

मै तो गुमराह हूं तुम भी खो जाओगे
कोई राह तुम तो मशहूर थाम लो

मै तन्हा ही रहा कहता हूं इसलिये
हमसफ़र मेरे हमदम  ज़रूर थाम लो

जो है हासिल नहीं उस की क्यों आरज़ू
चोट खाओगे ये अपना फ़ितूर थाम लो

रोहित जैन
07-12-2007
 

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