ज़रा पास ना आओ मुझे क़रार आ जाये

ज़रा पास ना आओ मुझे क़रार आ जाये
ज़रा लटों को उलझाओ मुझे क़रार आ जाये

ढ़क लो ज़रा आँचल, कर लो थोड़ा परदा
ज़रा खुल के शरमाओ मुझे क़रार आ जाये

कुछ दूर बैठो तुम, करने दो तमन्ना
ज़रा ख़लिश को बढ़ाओ मुझे क़रार आ जाये

शिकवा करो कोई, कुछ तो गिला रहे
ज़रा रूठ भी जाओ मुझे क़रार आ जाये

कोई तन्ज़ नहीं है, ना कोई बात बनी है
ज़रा लोगों को समझाओ मुझे क़रार आ जाये

रोहित जैन
12/03/2007
 

The URI to TrackBack this entry is: http://rohitler.wordpress.com/2008/02/20/%e0%a5%9b%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%93-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a5%87-%e0%a5%98%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%86-%e0%a4%9c%e0%a4%be/trackback/

RSS feed for comments on this post.

Leave a Comment