ज़रा पास ना आओ मुझे क़रार आ जाये
ज़रा लटों को उलझाओ मुझे क़रार आ जाये
ढ़क लो ज़रा आँचल, कर लो थोड़ा परदा
ज़रा खुल के शरमाओ मुझे क़रार आ जाये
कुछ दूर बैठो तुम, करने दो तमन्ना
ज़रा ख़लिश को बढ़ाओ मुझे क़रार आ जाये
शिकवा करो कोई, कुछ तो गिला रहे
ज़रा रूठ भी जाओ मुझे क़रार आ जाये
कोई तन्ज़ नहीं है, ना कोई बात बनी है
ज़रा लोगों को समझाओ मुझे क़रार आ जाये
रोहित जैन
12/03/2007