शाम खाली है जाम खाली है

शाम खाली है जाम खाली है
ज़िन्दगी यूँ गुज़रने वाली है

सब लूट लिया तुमने जानेजाँ मेरा
मैने तन्हाई मगर बचा ली है

किसी दरख़्त पर बना दिल है
तेरी हर याद यूँ संभाली है

दिल किसी का ज़रूर तोड़ा है
आज रुख़ पर नई सी लाली है

मुख़्तलिफ़ ख़्वाब सबकी आँखों में
तुम ने सब में जगह बना ली है

दिल के टुकड़े तलाशता हूँ अब
दोस्ती क़ैस से निभा ली है

क़त्ल कैसा गज़ब किया तुमने
ये मेरी ज़िन्दगी बचा ली है

ज़रा दिल भी जला दो अब मेरा
रात अब भी सियाह काली है

गया काबा गया मै काशी भी
हर जगह पर जनाब-ए-आली है

रोहित जैन
04/03/2007

क़ैस == Majnoo

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