मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा

मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा
ढ़ूँढ़ो कहां जाने ये दिल दीवाना बिखरा

नाकाम मै है इस से भी ग़ारत नहीं ग़म
टूटा जो दिल ये मेरा तो मैखाना बिखरा

जो था खुदा वो कितना है मायूस देखो
वो बिखरी मस्जिद ये बुतखाना बिखरा

किस सिम्त जाऊं ले कर मै ग़म-ए-दिल
बिखरा है हर अपना, हर बेगाना बिखरा

रोहित जैन
31-12-2007

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  1. जो था खुदा वो कितना है मायूस देखो
    वो बिखरी मस्जिद ये बुतखाना बिखरा bahut hi badhiya


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