मस्जिदों में भी साक़ी का नाम लेता हूँ
वूज़ू के वास्ते हाथों में जाम लेता हूँ
नशा कराके तो सब ही गिराया करते हैं
मेरी फ़ितरत है गिरतों को थाम लेता हूँ
सब से छुप के मोहब्बत में कोई लम्स नहीं
मै तो वादा-ए-दीदार-ए-आम लेता हूँ
रोहित जैन
09/03/2007
मस्जिदों में भी साक़ी का नाम लेता हूँ
वूज़ू के वास्ते हाथों में जाम लेता हूँ
नशा कराके तो सब ही गिराया करते हैं
मेरी फ़ितरत है गिरतों को थाम लेता हूँ
सब से छुप के मोहब्बत में कोई लम्स नहीं
मै तो वादा-ए-दीदार-ए-आम लेता हूँ
रोहित जैन
09/03/2007
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