जारी हैं क़त्ल अब भी बस सर हैं बदले बदले
हैं आज भी वो क़ातिल खंजर हैं बदले बदले
इल्ज़ाम हैं लगाते के हम हैं बदले बदले
दिल से ज़रा ये पूछो क्यूंकर हैं बदले बदले
अब प्यार भी नहीं है ना ऐतबार बाकी
शख़्स तो वो ही हैं तेवर हैं बदले बदले
रुकता नहीं है कोई किसी हादसे के कारण
शक्ल पर ना जाओ अंदर हैं बदले बदले
साक़ी है हमसे हैरां या औकात गिर गई है
ये जाम तो ना बदला, सागर हैं बदले बदले
अब ना रही वो चिलमन वो जिससे झाँकते थे
बस रास्ता वो ही है पर घर हैं बदले बदले
हम जिनकी मुश्किलों से मुश्किल में पड़ गये थे
वो हमको मुश्किलों में पाकर हैं बदले बदले
वो शख़्स तो कभी का मंज़िलों में गुम है
हम ही बचे हैं जिसके मंज़र हैं बदले बदले
आज मै दीवारों से बात कर रहा हूँ
तन्हा खड़ा हूँ यारों सब दर हैं बदले बदले
रोहित जैन
04-10-2007