पहलू में मेरे फिर दिल-ए-बरबाद आया है

पहलू में मेरे फिर दिल-ए-बरबाद आया है
वो शख्स आज फिर मुझे क्यों याद आया है

हर राह पर करता फ़िरा ये प्यार की तलाश
दिल जिस गली में भी गया नाशाद आया है

देखो किसी भी शाख पर पंछी नहीं है आज
लगता है फिर से बाग में सैयाद आया है

तेरी गली से दिल कभी खाली नहीं लौटा
हर बार नये ग़म से हो आबाद आया है

ये क्या खलिश है क्या तलब है क्या मिजाज़ है
फिर कोई खयाल दिल को बेबुनियाद आया है

रोहित जैन
01/02/2007

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