दिल से आज दिल का फ़ासला हो गया
मै ज़िंदगी से और आशना हो गया
दोस्तों का इखलास परखने जो चला मै
दुश्मनों में आज मै रुसवा हो गया
था रिश्ता जिससे कभी उम्मीद का कहीं
आज वो ही शख्स देखिये खुदा हो गया
अब सोचता हूँ क्यों बढ़ाये थे हौसले
वो भी तो आज मुझसे बेवफ़ा हो गया
जो मेरी ज़िंदगी का नूर था कभी
दाग वो माथे का बदनुमा हो गया
ऐतबार रहा-सहा भी जाता रहा
जब मै ख़ुद अपना आईना हो गया
दिल दैर में और मैकदे में मक़ाम
हाय इस इंसान को ये क्या हो गया
अब तो कितने ही आगाह हो जायें सभी
हर मोड़ पर क़ज़ा का रास्ता हो गया
हवस है जीते रहने की मुझे भी
मै भी तुम जैसा ही बेहया हो गया
रोहित जैन
18/06/2007