दिल में अजब से ख़यालात हैं
आज उनसे पहली मुलाक़ात है
ज़ुल्फ़ें जो बिखरीं तो फ़िर क्या कहें
लगा दिन में जैसे हुई रात है
शमा जो जली संग पतंगे जले
अब अपने भी ऐसे ही हालात हैं
दानिश थे जितने वो नादाँ हुए
अदाओं में उनकी कोई बात है
वो लहराया आँचल ज़रा देखिये
सितारों की धरती पे बरसात है
जो नज़रें झुकीं फ़ज़ा रुक गई
उसके भी मुझ से ही जज़्बात हैं
वो चुप भी रहे और कह भी गये
उलझे सभी अब सवालात हैं
मुझे देखकर वो तो शरमा गये
हुई आज कैसी इनायात हैं
जिये जा रहे हैं तेरी चाह में
मोहब्बत की ये ही रवायात हैं
अभी से यूँ बेबाक ना तुम बनो
अभी तो मोहब्बत की शुरुआत है
मै मुल्ज़िम के जैसे हुआ क़ैद हूँ
वो आँखें तो जैसे हवालात है
सुर्ख़ आरिज़ हुए वस्ल की बात पर
रुखों पे चमकते जवाबात है
इजाज़त ज़रा दें तो कह दूँ उन्हे
दिल में छुपे जो पैग़ामात है
रोहित जैन
26/03/2007