दिल को उनके आने की उम्मीद सी है
कुछ करम हो जाने की उम्मीद सी है
हाथ में जाम लिये बैठा हूँ
आँखों से मैख़ाने की उम्मीद सी है
धूप में जलता है सारा आलम
ज़ुल्फ़ के छा जाने की उम्मीद सी है
आँख खुलती नहीं देखकर उनको
ख़्वाबों को सजाने की उम्मीद सी है
उस चमन में बहार आई है
फूल खिल जाने की उम्मीद सी है
मुन्तज़िर दहलीज़ पर मै बैठा हूँ
दिल के बस जाने की उम्मीद सी है
रोहित जैन
12/09/2007