झाँके है ज़ुल्फ़ों से शबाब आधा आधा
रात आधी आधी माहताब आधा आधा
देखनेवालों संभल जाओ ज़रा तुम
है आज उनके रुख पे नक़ाब आधा आधा
नज़र में हैं पर वो हासिल नहीं हैं
है आधी हक़ीक़त सराब आधा आधा
चेहरे पे यूँ छाई ज़ुल्फ़ों की बदली
आफ़ताब को ढ़ाँके सहाब आधा आधा
हुस्न ने इश्क़ का मंज़र जो देखा
बेबाक नज़र में हिजाब आधा आधा
लब हिलते नहीं हाल कहती हैं आँखें
खराब आधा आधा आदाब आधा आधा
रोहित जैन
30/01/2007
माहताब == Moon
सराब == Mirage
आफ़ताब == Sun
सहाब == Cloud
हिजाब == Shyness
आदाब == Politeness