चाँद दर्द का जला, दिल में उतरी चाँदनी

चाँद दर्द का जला, दिल में उतरी चाँदनी
तन्हाई ही छोड़ गई, जहाँ पे बिखरी चाँदनी

ढ़ूंढ़ता ही रह गया सहर, शफ़क, शमा, सुकून
अंधियारा ही हाथ लगा ऐसी गुज़री चाँदनी

यूँ तो मेरी मय्यत पर सूरज भी रोने आया था
इसको ही बस इल्म नहीं, कुछ ना समझी चाँदनी

वो दामन नहीं गरेबाँ था जो फ़टा सा हाथ में आया था
हर एक ताना तोड़ गई कुछ ऐसी अखरी चाँदनी

रोहित जैन
28/03/2007

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