घर हवाओं में बना टिकता है क्या

घर हवाओं में बना टिकता है क्या
जो मुसाफ़िर हो कहीं रुकता है क्या

हमने तुमको साँस में शामिल किया
साँस लेने से कोई थकता है क्या

है उसे भी शौक दिल से खेलना
देखिये वो आप सा लगता है क्या

हम तो यूँ ही मिल रहे हैं मुफ़्त में
कोइ आशिक़ मोल भी बिकता है क्या

इश्क़ देखेगा नहीं मज़हब कोई
ये किसी दीवार से रुकता है क्या

सच्चा है जो बंदा उसी की बात है
कट के गिरता है मगर झुकता है क्या

गिर गई दीवार और छत भी गई
उस घर में अब देखो कोई दिखता है क्या

गौर ना करना मेरे लब्ज़ों पे तुम
जो दिलजला हो वो भला लिखता है क्या

रोहित जैन
04-10-2007

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