कह कह कर तुझ पर ग़ज़ल मै मीर हो गया
मसला दिल का ऐसा उलझा कश्मीर हो गया
वो आये मेरे करीब तो यारों यूँ लगा
मेरे ख्वाबों का ताजमहल तामीर हो गया
अश्क़ थे या शबनम के क़तरे आँखों में
वो जो भी थे बस देख उन्हे दिल चीर हो गया
इश्क़ में घायल हैं वाह क्या आलम आया है
उन होठों का मुस्काना भी शमशीर हो गया
खवाब मेरा चुपके से दिल के कागज़ पर उतरा
सब देखा किये वो यार की तस्वीर हो गया
हाल-ए-दिल उसके लब तक कहाँ आ पाया था
उन आँखों का झुक जाना ही तहरीर हो गया
रोहित जैन
17/01/07