इन्सां भी हो गये हैं ख़ुदा आज दोस्तों
ये है मोहब्बत का सिला आज दोस्तों
ना इश्क़ ना इख़लास ना उम्मीद ना खुशी
है ज़िंदगी जीने की सज़ा आज दोस्तों
जो लब्ज़ उसके वास्ते निकले थे एक दिन
वो लब्ज़ बन गये हैं दुआ आज दोस्तों
सदियों से ज़माना यूँ ही खाता है ठोकरें
ना इश्क़ की है कोई दवा आज दोस्तों
उसने तो कह दिया के नहीं उसको मोहब्बत
हम से ही हो सका ना दग़ा आज दोस्तों
इक वक़्त जो महकती रही थीं उसके प्यार में
वो साँस भी लगती है क़ज़ा आज दोस्तों
जो था कभी ग़ुरूर वो इल्ज़ाम हो गया
कैसी चली है हाय हवा आज दोस्तों
रोहित जैन
23/09/2007