आजकल उनसे तबियत नहीं मिलती

आजकल उनसे तबियत नहीं मिलती
अब वो पहले सी राहत नहीं मिलती

हम ही हैं जिसको नसीब हिज्र है
सब को शब-ए-फ़ुरक़त नहीं मिलती

इश्क़ से धुल गया है सारा जहाँ
किसी से किसी की सूरत नहीं मिलती

आँख चुराते हैं और चले जाते हैं
अब उन लबों से शिकायत नहीं मिलती

तू नहीं है तो तेरी याद है हर पल
अब कहीं मुझको ख़िलवत नहीं मिलती

रोहित जैन
21/03/2007

शब-ए-फ़ुरक़त = Night Of Seperation
ख़िलवत = Solitude

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