मै सजदे में उनके कुछ यूँ झुका था
वो शरम कर के बोले सर को उठा लो
हैं आँखों का काजल घटाओं सा फ़ैला
कहीं हो ना बारिश ये नज़रें झुका लो
ग़म मुझको देकर वो मुस्का के बोले
तुम्हारी अमानत है तुम ही संभालो
वो नीची नज़र की क़यामत तो देखी
ये जलवा भी देखें निगाहें मिला लो
ज़माने की नज़रें बड़ी बेरहम हैं
ज़रा अपनी चिलमन को फिर से लगा लो
ये धड़कन रुकी है तो फ़र्क़ क्या है
मोहब्बत रुकी हो तो मय्यत उठा लो रोहित जैन12-11-2007
please help me
didn’t get u preetam