बस एक बार मिली थी नज़र, देखो अब आया होश हमें
कुछ और जी लेते खवाबों में, यूँ बेसबब आया होश हमें
हाल-ए-दिल हमें भी कहना था, वो गये तब आया होश हमें
दिन गुज़रा उसकी यादों में, जो हुई शब आया होश हमें
लगा संवर गया है घर, लुटा पाया जब आया होश हमें
सुना था मोहब्बत है बला, सुनके कब आया होश हमें
अब भी तो वो ही दिखता है, अजब ये आया होश हमें
लाख चाहा भूल जायें उसे, कहाँ कब आया होश हमें
रोहित जैन
14/08/2007