लोग जीते हैं मर नहीं पाते
काम इतना सा कर नहीं पाते
सोचो कितने मरे हुए हैं वो
मौत से भी जो डर नहीं पाते
प्यार दुश्मन से किया था जितना
तुमसे उतना भी कर नहीं पाते
उन गरीबों का कौन हाकिम है
जो खुदा की नजर नहीं पाते
जिस गली में तुझे गंवाया था
अब वहां से गुजर नहीं पाते
अपनी बर्बादियों के किस्से में
आपका कम असर नहीं पाते
शेर में हाल-ए-दिल बयां करना
ये हुनर भी अगर नहीं पाते
दिल की वीरान राह पर ‘रोहित’
काश उजड़े शहर नहीं पाते
28/29-07-2011
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